महाराष्ट्र में उद्धव सरकार पर सियासी संकट के बादल छाए हैं. महा विकास अघाड़ी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल चुके एकनाथ शिंदे ने 40 विधायकों के समर्थन का दावा किया है. वहीं, मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे भी कह चुके हैं कि वो पद छोड़ने के लिए तैयार हैं, लेकिन पहले जो बागी हुए हैं वो सामने आकर बात करें. इस सियासी उथल-पुथल के बीच ये चर्चा भी चली है कि विधानसभा भंग की जा सकती है, लेकिन अभी ऐसा नहीं हुआ है.

फिलहाल के पावर टसल में एकनाथ शिंदे खेमा विधायकों को अपने पाले में करके अपनी ताकत दिखा रहा है तो दूसरी तरफ उद्धव ठाकरे इमोशनल पॉलिटिक्स से सबकुछ ठीक करने की कवायद में हैं. वहीं, कई राज्यों में ऐसी सियासी संकट वाली स्थिति पहले आ चुकी है. इन सबके बीच अगर सरकार का खेला हो जाता है तो राज्यपाल और स्पीकर का किरदार भी अहम हो जाता है.

स्पीकर की होगी अग्नि परीक्षा

बागी विधायकों का क्या करना है, ये तय करना स्पीकर का काम होगा. काम चलाऊ स्पीकर भी एनसीपी के विधायक हैं. बागी विधायक दल-बदल कानून के तहत आते हैं. उनकी दलीलें स्वीकार करना या ठुकराते हुए अपने विवेक से निर्णय लेते हुए उनकी योग्यता-अयोग्यता पर फैसला लेना अब स्पीकर की जिम्मेदारी होगी. सरकार की अग्नि परीक्षा के साथ-साथ ये स्पीकर की भी अग्नि परीक्षा होगी.

राष्ट्रपति शासन की संभावना भी प्रबल

राष्ट्रपति शासन की संभावना भी प्रबल है, क्योंकि विधानसभा भंग करने का सीधा असर राष्ट्रपति चुनाव पर पड़ेगा, जबकि विधानसभा को लंबित रखते हुए राज्यपाल राष्ट्रपति शासन हो तो विधायक और बागी विधायक भी वोट डाल सकेंगे. अगर स्पीकर ने बागी विधायकों को अयोग्य घोषित कर दिया तो वो अयोग्य हो ही जाएंगे, लेकिन अगर अयोग्य घोषित विधायक हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट चले गए और कोर्ट ने स्पीकर के आदेश पर रोक लगा दी तो ऐसी स्थिति में विधायक वोट कर पाएंगे.

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